धुंधलापन
खोई याद्दाश्त
विवश मन
आवारा मन
बेलगाम हैं घोड़े
सोच तूफ़ानी
बंजारा दिल
उमड़ते काफिले
अंधी गलियां
धूसर पथ
रेतीला गलियारा
कुछ ना सूझे
बर्फ़ की तहें
सफ़ेद लिहाफ सी
सिकती धरा
धरा ने धारी
दूध की मलाई सी
बर्फ़ ही बर्फ़
माटी में लोटती
सांवली सलोनी सी
बेरंग बर्फ़
बर्फ़ के टीले
तरल कभी ठोस
हवा बर्फीली
गिरती बर्फ़
पेड़ हुए कंकाल
पाले के मारे
मीनाक्षी धनवंतरि