Tuesday, July 15, 2014

जादू से भरे हाथ (2)


कॉफी का प्याला

कागज़ कलम है
शब्दों की झाग



प्राण फूँकते
जादू से भरे हाथ
संजीवनी से



सुरमई मेघ हैं (2)

सलोना नभ
सुरमई मेघ हैं
साँवली घटा
तूफानी रात
तड़ित दामिनी सी
भयभीत मैं

गर्व किस बात का (5)


क्यों मैं ही मैं हूँ

गर्व किस बात का
नासमझी क्यों


अहम त्यागो
अमर तुम नहीं
मृत्यु निश्चित


घना अंधेरा
छाया का साया नहीं
अविश्वास है


मृत्यु मित्र सी
चुपके से आती है
गले लगाती


यायावरी है
आना-जाना लोगों का
थके न कोई

अक्स में दिल मेरा (9)


 
गौर से देखो
अक्स में दिल मेरा
देश में छोड़ा





इतने एसी
कितना प्रदूषण
दिल धड़का





राह चलते
किताबें खरीदीं थी
सस्ती दो तीन





ध्यान में लीन
कबूतर सोच में

मन मोहता




गहरा कुँआ
जल-जीवन भरा

मन भी वैसा




प्यारे बालक
देश-प्रेम दर्शाएँ
रिपब्लिक डे





रस्ता देखूँ मैं
कोई मीत मिलेगा
आशा थी बस




देखे किसको
कागा पीठ दिखाए
गीत सुनाए




 मीत को पाया
वट-वृक्ष का साया

मन भरमाया


(photos clicked by me from hotel window in Mumbai) 



मौन की भाषा पढ़ो (2)

मौन हुई मैं
स्नेह करे निशब्द
भाव गहरे
शब्द न पाऊँ
मौन की भाषा पढ़ो
आभारी हूँ मैं

साया मन को भाया (3)



सपना आया

साया मन को भाया
स्नेह की छाया



खड़ी मुस्काये
आज नहीं तो कल
पाना तुझको



विश्वास मुझे 
जन्मों जन्मों का नाता
मिलना ही है

जल बिन मानव (2)





जीवन जले

जल बिन मानव
कैसे जिएगा ?







बहता जल

जल से जीवन है
कीमत जानो