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Tuesday, May 17, 2016
Tuesday, July 15, 2014
अक्स में दिल मेरा (9)
गौर से देखो
अक्स में दिल मेरा
देश में छोड़ा
इतने एसी
कितना प्रदूषण
दिल धड़का
राह चलते
किताबें खरीदीं थी
सस्ती दो तीन
ध्यान में लीन
कबूतर सोच में
मन मोहता
गहरा कुँआ
जल-जीवन भरा
मन भी वैसा
प्यारे बालक
देश-प्रेम दर्शाएँ
रिपब्लिक डे
रस्ता देखूँ मैं
कोई मीत मिलेगा
आशा थी बस
देखे किसको
कागा पीठ दिखाए
गीत सुनाए
मीत को पाया
वट-वृक्ष का साया
मन भरमाया
(photos clicked by me from hotel window in Mumbai)
Sunday, June 22, 2014
निपट अकेली वो (माँ) 13
कैसे लिखूँ मैं
बुद्धि जड़ हो गई
मन बोझिल
सोचा था मैंने
सफ़रनामा न्यारा
दर्ज करूँगी
लेखनी रुकी
थम गए हैं शब्द
गला रुँधा है
कविता हो न
लेख लिख न पाऊँ
बात बने न
अर्धांग रूठा
निपट अकेली वो
दर्द गहरा
साथी जो छूटा
मन-पंछी व्याकुल
रोता ही जाए
समझूँ कैसे
अंतर्मन की पीड़ा
छटपटाऊँ
छटपटाऊँ
सरल नहीं
लिख पाना कुछ भी
हाल बेहाल
देखा जो मैंने
मैना जब चहकी
मन बहला
माँ ने भी देखा
ठंडी सी आह भरी
नैनों में नीर
पंछी से सीखो
कर्म करो अपना
मोह न जानो
उड़ जाते हैं
चींचीं करते बच्चे
पाते ही पंख
यादों के साए
खुश्बू बनके छाएँ
इच्छा सबल
Thursday, June 13, 2013
त्रिपदम पले हैं फूलों में (16)
पदम तले
त्रिपदम पले हैं
सुगन्ध भरे
नवयौवना
गुलानारी रूपसी
नई नवेली
न्यारा है रूप
चित्रकला अनोखी
रंगों की माया
बिन्दु चक्र में
सम्मोहन की छाया
भरा रहस्य
बाँहें फैलाए
धरा खड़ी निहारे
नीला आकाश
मैं और तुम
उपवन के माली
फूल खिले हैं
स्नेह के धागे
पीले केसर जैसे
अति सुन्दर
काँटो का संगी
गुलाब नाज़ुक सा
गुलों का गुल
धरा सजी है
लाल पीले रंग से
पत्ते मुस्काए
गुलाबी गोरी
प्रहरी तने हुए
नाता गहरा
हरा कालीन
टंके हैं बेल-बूटे
बेमोल कला
गुलाबी बाँहें
नभ को छूना चाहें
हँसी दिशाएँ
दहका रवि
हो गए लाल पीले
खिलते फूल
दृढ़-निश्चयी
जीने का लक्ष्य पाएँ
ठान लो बस
रंग रंगीला
महकता जीवन
कण्टकहीन
धुंधले साए
छटेंगे इक दिन
खिलेगे फूल
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