क्यों मैं ही मैं हूँ
गर्व किस बात का
नासमझी क्यों
अहम त्यागो
अमर तुम नहीं
मृत्यु निश्चित
घना अंधेरा
छाया का साया नहीं
अविश्वास है
मृत्यु मित्र सी
चुपके से आती है
गले लगाती
यायावरी है
आना-जाना लोगों का
थके न कोई