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Tuesday, July 15, 2014

गर्व किस बात का (5)


क्यों मैं ही मैं हूँ

गर्व किस बात का
नासमझी क्यों


अहम त्यागो
अमर तुम नहीं
मृत्यु निश्चित


घना अंधेरा
छाया का साया नहीं
अविश्वास है


मृत्यु मित्र सी
चुपके से आती है
गले लगाती


यायावरी है
आना-जाना लोगों का
थके न कोई

Tuesday, December 11, 2012

सत्य का खोजी (कविता) 5


मैं मैं नहीं हूँ
जो हूँ वैसी नहीं हूँ
भ्रमित मन

छलिया बन
पाखंड करता है
नादान मन

प्रशंसा पाए
मेरा मैं जो उत्कृष्ट 
तृप्त हो जाए

मोह पाश है
विश्व मकड़ी जाल
उलझे मन 

सत्य का खोजी
प्रकाश स्वयं बन
मार्गदर्शक