Tuesday, July 15, 2014

स्मृति-दंश (5)




ख़ाली आँखें
रेगिस्तान अपार
वीरानापन

पीछा करते
सपनों के हैं साए
छूना है बस

स्वप्न सलोना
पा लूँगी इक दिन
विश्वास भरा

खुश्बू प्यार की
महकते हैं प्राण
खिला जीवन

स्वर्णिम पल
मिलन अलौकिक
स्मृति-दंश

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