1
अकेली खड़ी
देखूँ खिड़की से मैं
माया मोहिनी
2
कजरा मेघ
नभ के नैना सोहें
भूमि को भाएँ
3
उतरी बर्फ़
कुतरी रुई जैसी
धरा लिहाफ़
4
4
निर्वस्त्र खड़े
साधनारत वृक्ष
अघोरी लगें
5
एक ही पत्ता
जकड़ा है मोह में
जुड़ा डाली से
6
जड़ों से जुड़े
अटल औ' अडिग
वृक्ष महान