Showing posts with label पत्ता. Show all posts
Showing posts with label पत्ता. Show all posts

Tuesday, July 15, 2014

लो आया ग्रीष्म (5)


लो आया ग्रीष्म

जला, तपा भभका
सन्नाटा छाया



बरसे आग
जले धरा की देह
दहका सूरज



लू का थपेड़ा
थप्पड़ सा लगता
बेहोशी छाती



प्यास बुझे न
जल है प्रेम बूँद
तरसे मन



खुश्क से पत्ते
पैरों तले चीखते
मिटे पल में

Thursday, June 13, 2013

क्रेनबेरी लेन से ---- (6)

1

अकेली खड़ी 

देखूँ खिड़की से मैं

माया  मोहिनी 

2

कजरा मेघ

नभ के नैना सोहें 

भूमि को भाएँ 

3

उतरी बर्फ़ 

कुतरी रुई जैसी

धरा लिहाफ़

4


निर्वस्त्र खड़े

साधनारत वृक्ष 

अघोरी लगें 

5

एक ही पत्ता

जकड़ा है मोह में 

जुड़ा डाली से 

6

जड़ों से जुड़े 

अटल औ' अडिग 

वृक्ष महान