धरा की माँग
झिलमिलाता व्योम
चाँदी बिखरी
कर कस्तूरी
सखी बन महकी
सूँघें हिरणी
या
नन्हीं के हाथ
कस्तूरी महकती
ढूँढता मृग
झरता स्नेह
तृप्त धरा आकाश
माया मोहती
स्वर्ग का झूला
माँ का आँचल न्यारा
झूलता लाल
बच्चों का मोह
माँ छिपाती डैनों में
जग निष्ठुर