Tuesday, July 15, 2014
धूल है नकचढ़ी (6)
प्याला हो जैसे
रेत में डूबा रवि
आधा भरा सा
धूल के कण
पत्तों पर पसरे
चमकीले से
सिर चढ़ती
धूल है नकचढ़ी
चिड़चिड़ी सी
धूल ही धूल
हवा तूफ़ानी तेज़
दम घुटता
धूसर पेड़
धूल भरी शाखाएँ
पत्तों पे गर्द
नभ ने ओढ़ा
धरती का आँचल
मटमैला सा
स्वेद सुरा को चख (2)
छाया रहस्य
धूल से आच्छादित
मौन हैं बुत
साकी सोया सा
स्वेद सुरा को चख
मद की मस्ती
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