Tuesday, July 15, 2014

अक्स में दिल मेरा (9)


 
गौर से देखो
अक्स में दिल मेरा
देश में छोड़ा





इतने एसी
कितना प्रदूषण
दिल धड़का





राह चलते
किताबें खरीदीं थी
सस्ती दो तीन





ध्यान में लीन
कबूतर सोच में

मन मोहता




गहरा कुँआ
जल-जीवन भरा

मन भी वैसा




प्यारे बालक
देश-प्रेम दर्शाएँ
रिपब्लिक डे





रस्ता देखूँ मैं
कोई मीत मिलेगा
आशा थी बस




देखे किसको
कागा पीठ दिखाए
गीत सुनाए




 मीत को पाया
वट-वृक्ष का साया

मन भरमाया


(photos clicked by me from hotel window in Mumbai) 



मौन की भाषा पढ़ो (2)

मौन हुई मैं
स्नेह करे निशब्द
भाव गहरे
शब्द न पाऊँ
मौन की भाषा पढ़ो
आभारी हूँ मैं

साया मन को भाया (3)



सपना आया

साया मन को भाया
स्नेह की छाया



खड़ी मुस्काये
आज नहीं तो कल
पाना तुझको



विश्वास मुझे 
जन्मों जन्मों का नाता
मिलना ही है

जल बिन मानव (2)





जीवन जले

जल बिन मानव
कैसे जिएगा ?







बहता जल

जल से जीवन है
कीमत जानो


आग़ोश में सुक़ून






सिहरी काँपीं
आगोश मे सकून
सूरज तापे



(दमाम में 8-10 क्लिक करने के बाद ही मेरी मन-चाही मन-भावन तस्वीर उतर पाई)

लो आया ग्रीष्म (5)


लो आया ग्रीष्म

जला, तपा भभका
सन्नाटा छाया



बरसे आग
जले धरा की देह
दहका सूरज



लू का थपेड़ा
थप्पड़ सा लगता
बेहोशी छाती



प्यास बुझे न
जल है प्रेम बूँद
तरसे मन



खुश्क से पत्ते
पैरों तले चीखते
मिटे पल में

मॉल देहरान का (6)


देखा हमने
मॉल देहरान का
नया नवेला



बुर्के में बंद
ख्वाहिशे हैं हज़ार
पूरी हों अब



 सला का वक्त
पर्दे में गपशप
दुकाने बंद




दोस्त मिले दो
दम लेने को बैठे
कॉफी थे पीते






 फैलती खुश्बू

सिनामन के रोल्ज़

मुँह में पानी





पल दो पल

बातों में मशगूल

पिता औ' पुत्र