Tuesday, July 15, 2014

स्वेद सुरा को चख (2)


छाया रहस्य
धूल से आच्छादित

मौन हैं बुत



साकी सोया सा

स्वेद सुरा को चख

मद की मस्ती 

जीवन धुआँ



जीवन धुआँ 
साँसो को पीते जाते

उड़ती उम्र

बादल छल्ले



हुक्का आकाश 
कश खींचे धरती 

बादल छल्ले

हाइकु समूह के लिए (6)


धरा की माँग
झिलमिलाता व्योम 
चाँदी बिखरी


कर कस्तूरी
सखी बन महकी 
सूँघें हिरणी
    या 
नन्हीं के हाथ
कस्तूरी महकती
ढूँढता मृग 

झरता स्नेह
तृप्त धरा आकाश
माया मोहती 

स्वर्ग का झूला
माँ का आँचल न्यारा
झूलता लाल 

बच्चों का मोह
माँ छिपाती डैनों में
जग निष्ठुर 


शब्द भेदते (2)



बात औ' भात 
जीभ के वशीभूत 
विष वमन 


शब्द भेदते

तीर बन चुभते
भाव मरते

Sunday, June 22, 2014

मौत अंगूरी न्यारी (2)




साकी सा यम
मौत अंगूरी न्यारी
रूप खिलेगा/नशा चढ़ेगा/मोक्ष मिलेगा

मुत्यु प्रिया सी
इक दिन आएगी
गले लगाओ

कोहरा गूँगा (2)




वीरान पथ
निपट अकेली मैं
कोहरा गूँगा 

नीले सपने
रजनी भेदभरी
 सोई है धरा