गौर से देखो
अक्स में दिल मेरा
देश में छोड़ा
इतने एसी
कितना प्रदूषण
दिल धड़का
राह चलते
किताबें खरीदीं थी
सस्ती दो तीन
ध्यान में लीन
कबूतर सोच में
मन मोहता
गहरा कुँआ
जल-जीवन भरा
मन भी वैसा
प्यारे बालक
देश-प्रेम दर्शाएँ
रिपब्लिक डे
रस्ता देखूँ मैं
कोई मीत मिलेगा
आशा थी बस
देखे किसको
कागा पीठ दिखाए
गीत सुनाए
मीत को पाया
वट-वृक्ष का साया
मन भरमाया
(photos clicked by me from hotel window in Mumbai)