Friday, January 27, 2017

धुँध औ' धुआँ

धुँध औ' धुआँ  
गहराता दिल में  
सहमीं  साँसें


 धुँधली यादें  
 दर्पण की चाह में  
 तिलमिलातीं 

Tuesday, May 17, 2016

Sunday, May 15, 2016

प्यार की डली - माँ (2)



मीठी -सी माँ है
लोरी मिश्री सी घुली
प्यार की डली 
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माँ की बिटिया
प्यार दुलार पाया
सबल हुई । 


Tuesday, July 15, 2014

संघर्षरत जिएँ (8)


प्रेम सत्य है
रूप रंग सुगन्ध
त्रिपदम सा


निशा स्तब्ध थी
सागर सम्मोहित
लहरें गातीं

धरा ठिठकी
लहरों में उद्वेग
चंदा निहारे

सुर कन्या सी
आलिंगनबद्ध थीं
लहरें प्यारी


रेतीला मन
फिसलते कदम
दिशाहीनता

शीत बसंती
बदलती ऋतुएँ
झरता ताप

गरजे मेघ
दामिनी दमकती
सूरज भागा

        जीवन-चक्र         
संघर्षरत जिएँ
आत्म-शक्ति हो

जादू से भरे हाथ (2)


कॉफी का प्याला

कागज़ कलम है
शब्दों की झाग



प्राण फूँकते
जादू से भरे हाथ
संजीवनी से



सुरमई मेघ हैं (2)

सलोना नभ
सुरमई मेघ हैं
साँवली घटा
तूफानी रात
तड़ित दामिनी सी
भयभीत मैं

गर्व किस बात का (5)


क्यों मैं ही मैं हूँ

गर्व किस बात का
नासमझी क्यों


अहम त्यागो
अमर तुम नहीं
मृत्यु निश्चित


घना अंधेरा
छाया का साया नहीं
अविश्वास है


मृत्यु मित्र सी
चुपके से आती है
गले लगाती


यायावरी है
आना-जाना लोगों का
थके न कोई